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| Navratri Puja Samagri List |
नवरात्रि पूजा सामग्री लिस्ट Navratri Puja Samagri List - हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक नवरात्री त्यौहार का विशेष महत्व है। नवरात्रि में देवी माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की अलग-अलग दिन पूजा-अर्चना की जाती है, इसमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और आखरी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक माता रानी धरती पर घूमती हैं और भक्तों के दुख दूर करती हैं।
नवरात्रि कलश स्थापना और माता रानी के श्रृंगार सामान की पूरी लिस्ट -
1. माता रानी के श्रृंगार का सामान (Navratri Mata Rani Shringar saman)
- मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार की लिस्ट - श्रृंगार के सामान में माता रानी को नवरात्रि में पूरे सोलह श्रृंगार चढ़ाने का विधान है। इन सामग्रियों में मेहंदी, बिंदी, लाल चूड़ी, सिंदूर, लाल चुनरी, नेल पॉलिश, लिपस्टिक, आलता, बिछिया, दर्पण, कंघी, महावर, काजल, चोटी, पायल, इत्र, लाल चुनरी, पायल, कान की बाली, नाक की नथ, मेहंदी आदि सामान शामिल करें।
2. कलश स्थापना के लिए सामग्री (Navratri Kalash Sthapana Samagri)
नवरात्रि में कलश स्थापना करने के लिए मुख्य रूप से पीतल, तांबे या मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र, कलावा, नारियल, छोटी लाल चुनरी, आम के पत्ते, जौ, सिंदूर, जल, दीपक, बालू या रेत, तिल का तेल या घी, मिट्टी इन सभी का उपयोग किया जाता है। कलश स्थापना के समय सबसे पहले मिट्टी के एक पात्र को जमीन में थोड़ी सी बालू या रेत डालकर रखें और इसमें मिट्टी डालकर जौ डाल दें। इस पात्र के बीचों बीच कलश में पानी भरकर रखें। कलश के ऊपर आम के 5 या 7 पत्ते रखें और एक छोटी कटोरी ढककर उसके ऊपर चुनरी में नारियल लपेटकर रख दें। कलश में कलावा बांधें और उसके ऊपर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं।
3. नवरात्रि की पूजा का सामान (Navratri Puja ka Saman)
- माता रानी की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री - माता की तस्वीर या मूर्ति, आसन के लिए लाल रंग का कपड़ा, कलश, गंगाजल , मौली, सिंदूर रोली, अक्षत, सिक्का, गेहूं या अक्षत, कुमकुम, आम के पत्ते का पल्लव (5 आम के पत्ते की डली, मिट्टी का बर्तन, शुद्ध मिट्टी, मिट्टी पर रखने के लिए एक साफ कपड़ा, कलावा, गेहूं या जौ, पीतल या मिट्टी का दीपक, घी, रूई बत्ती, सिंदूर, लाल वस्त्र, जटा वाला नारियल, इलायची, फल या मिठाई, हनव कुंड, अगरबत्ती, चौकी के लिए लाल कपड़ा, दुर्गासप्तशती किताब, साफ चावल, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल, फूल, फूलों की माला, लौंग, कपूर, बताशे, पान, सुपारी, कलावा, मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी।
4. हवन के लिए सामग्री
- हवन कुंड, लौंग का जोड़ा, कपूर, सुपारी, गुग्ल, लोबान, घी, पांच मेवा और अक्षत।
5. अखंड ज्योति के लिए सामग्री
- पीतल या मिट्टी का साफ दीया, जोत के लिए रुई की बत्ती, रोली या सिंदूर, चावल।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Ghatasthapana ka shubh muhurat kab hota hai?
Ghatasthapana hamesha Navratri ke pehle din (Pratipada Tithi) subah ke samay ya Abhijit Muhurat mein karni chahiye.
Q2. Navratri mein akhand jyoti kaise jalayein?
Akhand jyoti ko ya toh pure ghee se ya fir shuddh til ke tel sejalaya jata hai, jise maata ke samne sthapit karke 9 dino tak surakshit rakha jata hai.

