March 2027 Hindu Calendar
मार्च 2027 हिंदू कैलेंडर
व्रत • त्योहार • एकादशी • होली • धार्मिक तिथियाँ
मार्च का महीना भगवान शिव की आराधना, भगवान विष्णु के व्रत और होली के रंगों के लिए खास है। मार्च 2027 में महाशिवरात्रि, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी, होलिका दहन, होली, रंग पंचमी और शीतला अष्टमी जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएँगे।
अगर आप मार्च महीने के व्रत और त्योहारों की तारीखें जानना चाहते हैं, तो नीचे दी गई कैलेंडर सूची देखें। इसमें प्रमुख धार्मिक तिथियों के साथ त्योहारों का महत्व और पूजा से जुड़ी सामान्य जानकारी भी दी गई है।
🌺 March 2027 Festival Highlights
- 3–4 मार्च — विजया एकादशी
- 5 मार्च — शुक्र प्रदोष व्रत
- 6 मार्च — महाशिवरात्रि
- 8 मार्च — सोमवती अमावस्या
- 10 मार्च — फुलेरा दूज
- 12 मार्च — विनायक चतुर्थी
- 15 मार्च — मीन संक्रांति
- 18 मार्च — आमलकी एकादशी
- 20 मार्च — प्रदोष व्रत
- 21–22 मार्च — होलिका दहन और फाल्गुन पूर्णिमा
- 22–23 मार्च — होली, धुलंडी और डोल पूर्णिमा
- 24 मार्च — भाई दूज
- 25 मार्च — संकष्टी चतुर्थी
- 27 मार्च — रंग पंचमी
- 28 मार्च — शीतला सप्तमी
- 30 मार्च — शीतला अष्टमी और बसौड़ा
📅 March 2027 Hindu Calendar: व्रत और त्योहारों की तारीखें
| तारीख | दिन | व्रत / त्योहार |
|---|---|---|
| 2 मार्च | मंगलवार | महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती |
| 3–4 मार्च | बुधवार–गुरुवार | विजया एकादशी |
| 5 मार्च | शुक्रवार | शुक्र प्रदोष व्रत |
| 6 मार्च | शनिवार | महाशिवरात्रि |
| 8 मार्च | सोमवार | सोमवती अमावस्या |
| 10 मार्च | बुधवार | फुलेरा दूज |
| 12 मार्च | शुक्रवार | विनायक चतुर्थी |
| 15 मार्च | सोमवार | मीन संक्रांति |
| 18 मार्च | गुरुवार | आमलकी एकादशी |
| 20 मार्च | शनिवार | प्रदोष व्रत |
| 21–22 मार्च | रविवार–सोमवार | होलिका दहन / फाल्गुन पूर्णिमा |
| 22–23 मार्च | सोमवार–मंगलवार | होली / धुलंडी / डोल पूर्णिमा |
| 24 मार्च | बुधवार | भाई दूज |
| 25 मार्च | गुरुवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 27 मार्च | शनिवार | रंग पंचमी |
| 28 मार्च | रविवार | शीतला सप्तमी |
| 30 मार्च | मंगलवार | शीतला अष्टमी / बसौड़ा |
🙏 मार्च 2027 के प्रमुख त्योहार
विजया एकादशी — 3–4 मार्च
विजया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, मंत्र-जप करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए साहस और संकल्प की प्रेरणा देता है।
महाशिवरात्रि — 6 मार्च
महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हैं। कई श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रात में शिव पूजा तथा जागरण करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
सोमवती अमावस्या — 8 मार्च
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु स्नान, दान, पूजा और ध्यान करते हैं। कई परिवार पितरों के निमित्त तर्पण और अन्य धार्मिक कर्म भी करते हैं।
फुलेरा दूज — 10 मार्च
फुलेरा दूज भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की भक्ति से जुड़ा पर्व है। ब्रज क्षेत्र में इसे फूलों और भजन-कीर्तन के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में फूलों से सजावट की जाती है और भक्त राधा-कृष्ण के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
विनायक चतुर्थी — 12 मार्च
विनायक चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा का दिन है। भक्त श्री गणेश को दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करते हैं तथा बुद्धि, सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता की प्रार्थना करते हैं। पूजा के समय गणेश मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
मीन संक्रांति — 15 मार्च
मीन संक्रांति सूर्य के मीन राशि में प्रवेश का पर्व है। इस अवसर पर कई श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, पूजा करते हैं और दान-पुण्य में भाग लेते हैं। संक्रांति के अवसर पर धार्मिक कार्यों के साथ सेवा और जरूरतमंदों की सहायता का भी महत्व माना जाता है।
आमलकी एकादशी — 18 मार्च
आमलकी एकादशी भगवान विष्णु की पूजा और आंवले के धार्मिक महत्व से जुड़ी है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं और पूजा-पाठ तथा दान करते हैं। इस दिन आंवले के वृक्ष को भी धार्मिक श्रद्धा से देखा जाता है।
प्रदोष व्रत — 20 मार्च
प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए रखा जाता है। भक्त शाम के समय शिव आराधना करते हैं, दीप जलाते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं। यह व्रत महीने में आने वाली प्रदोष तिथि पर श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
होलिका दहन — 21–22 मार्च
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की कथा इस पर्व का प्रमुख आधार है, जिसमें सच्ची भक्ति और विश्वास की जीत होती है। लोग परंपरा के अनुसार होलिका की पूजा करते हैं और शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करते हैं।
होली और धुलंडी — 22–23 मार्च
होली रंगों, प्रेम और भाईचारे का त्योहार है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और परिवार तथा मित्रों के साथ खुशियाँ मनाते हैं। यह पर्व पुराने मतभेद भुलाकर रिश्तों में मिठास लाने और मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है।
भाई दूज — 24 मार्च
भाई दूज भाई-बहन के स्नेह का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के मंगल और सुखी जीवन की कामना करती हैं। परिवार में पूजा, तिलक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस अवसर को मनाया जाता है।
संकष्टी चतुर्थी — 25 मार्च
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं, गणेश जी की पूजा करते हैं और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। कई परंपराओं में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
रंग पंचमी — 27 मार्च
रंग पंचमी होली के बाद मनाया जाने वाला रंगों का त्योहार है। मध्य भारत और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इसे उत्साह से मनाया जाता है। लोग रंग खेलते हैं, उत्सवों में भाग लेते हैं और मिल-जुलकर त्योहार की खुशियाँ बाँटते हैं।
शीतला सप्तमी — 28 मार्च
शीतला सप्तमी माता शीतला की पूजा से जुड़ी तिथि है। श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस दिन बसौड़ा से जुड़ी तैयारियाँ और पारंपरिक पूजा की जाती है।
शीतला अष्टमी और बसौड़ा — 30 मार्च
शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा की जाती है। कई परिवारों में बसौड़ा परंपरा के अनुसार एक दिन पहले भोजन बनाया जाता है और अगले दिन माता को भोग लगाकर वही भोजन ग्रहण किया जाता है। इस पर्व की विधि और खान-पान से जुड़ी परंपराएँ अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
❓ Frequently Asked Questions
मार्च 2027 में महाशिवरात्रि कब है?
महाशिवरात्रि 6 मार्च 2027, शनिवार को है।
मार्च 2027 में होली कब है?
होली और धुलंडी 22–23 मार्च 2027 के दौरान मनाई जाएगी।
मार्च 2027 में विजया एकादशी कब है?
विजया एकादशी 3–4 मार्च 2027 को है।
आमलकी एकादशी कब है?
आमलकी एकादशी 18 मार्च 2027, गुरुवार को है।
रंग पंचमी कब है?
रंग पंचमी 27 मार्च 2027, शनिवार को है।
शीतला अष्टमी या बसौड़ा कब है?
शीतला अष्टमी और बसौड़ा 30 मार्च 2027, मंगलवार को है।
📚 References
BhaktiLyrics.com पर व्रत, त्योहार और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी जानकारी पढ़ते रहें।

