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| शिव सुवर्णमाला स्तुति |
Shiv Suvarnmala Stuti Lyrics in Hindi: जानिए शिव सुवर्णमाला स्तुति और इसके अद्भुत लाभ
सनातन संस्कृति में देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई स्तोत्रों और स्तुतियों की रचना की गई है। शिव भक्त अपनी भक्ति के अनुसार अलग-अलग स्तोत्रों का पाठ करते हैं। इन्ही में से एक अत्यंत दुर्लभ, मधुर और चमत्कारी स्तुति है—"शिव सुवर्णमाला स्तुति" (Shiv Suvarnmala Stuti)।
सुवर्ण का अर्थ होता है 'सोना' और माला का अर्थ 'फूलों या मोतियों की लड़ी'। जिस प्रकार सोने के आभूषण हमारे शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, ठीक उसी प्रकार यह स्तुति भगवान शिव के चरणों में अर्पित किए जाने वाले स्वर्ण समान अमूल्य शब्दों की माला है।
आइए इस पवित्र स्तुति के बारे में विस्तार से जानते हैं और इसके लिरिक्स पढ़ते हैं।
शिव सुवर्णमाला स्तुति (Shiv Suvarnmala Stuti: Shiva Stotram)
ईशगिरीश नरेश परेश महेश बिलेशय भूषण भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
उमया दिव्य सुमङ्गल विग्रह यालिङ्गित वामाङ्ग विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
ऊरी कुरु मामज्ञमनाथं दूरी कुरु मे दुरितं भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
ॠषिवर मानस हंस चराचर जनन स्थिति लय कारण भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
अन्तः करण विशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
करुणा वरुणा लय मयिदास उदासस्तवोचितो न हि भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
जय कैलास निवास प्रमाथ गणाधीश भू सुरार्चित भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
झनुतक झङ्किणु झनुतत्किट तक शब्दैर्नटसि महानट भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
धर्मस्थापन दक्ष त्र्यक्ष गुरो दक्ष यज्ञशिक्षक भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुण रुचितं चिरं प्रदेहि विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
भगवन् भर्ग भयापह भूत पते भूतिभूषिताङ्ग विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शर्व देव सर्वोत्तम सर्वद दुर्वृत्त गर्वहरण विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्मे त्येल्लक्षण लक्षित भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
हाऽहाऽहूऽहू मुख सुरगायक गीता पदान पद्य विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
शिवाय नमः
शिवाय नमः
शिवाय नमः ॐ नमः शिवाय
- शिव चालीसा
- श्री वीरभद्र चालीसा
- आरती - ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय
- आरती - हर हर हर महादेव
- आरती - जयति जयति जग-निवास
- आरती - ॐ जय गंगाधर
- आरती - शीश गंग अर्धन्ग पार्वती
- आरती - विश्वेश्वर नीराजनम्:
- शिव मंत्र
- महामृत्युंजय मंत्र
शिव सुवर्णमाला स्तुति का महत्व और लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त नियमित रूप से या प्रदोष व्रत और सावन के महीने में शिव सुवर्णमाला स्तुति का पाठ करता है, उसे निम्नलिखित विशेष लाभ प्राप्त होते हैं:
- मानसिक शांति: इसके पाठ से मन का भटकाव दूर होता है और मानसिक तनाव (Stress) से मुक्ति मिलती है।
- समस्याओं का निवारण: महादेव की कृपा से जीवन में आ रही बाधाएं और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह स्तुति साधक को भगवान शिव के सान्निध्य का अहसास कराती है और भक्ति भाव को मजबूत करती है।
पाठ करने की सही विधि (Puja Vidhi)
- सुबह या प्रदोष काल: इस स्तुति का पाठ करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल (प्रदोष काल) का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
- शिवलिंग का पूजन: स्तुति शुरू करने से पहले शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित करें।
- आसन और ध्यान: कुश या ऊनी आसन पर बैठकर शांत चित्त से महादेव का ध्यान करते हुए इस स्तुति का पाठ करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
भगवान शिव भोले हैं और वे भाव के भूखे हैं। शिव सुवर्णमाला स्तुति का पाठ आपके मन को निर्मल और जीवन को सुखमय बनाने का एक बेहतरीन मार्ग है। आज ही अपने पूजा अनुष्ठान में इस स्तुति को शामिल करें और महादेव की कृपा प्राप्त करें।
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