हिरणी हरी सू अरज करे लिरिक्स | Hirni Hari Su Araj Kare Lyrics

M Prajapat
0
हिरणी हरी सू अरज करे (Hirni Hari Su Araj Kare Lyrics)
हिरणी हरी सू अरज करे

हिरणी हरी सू अरज करे लिरिक्स एक लोकप्रिय राजस्थानी भजन है, जिसे भक्ति और लोक-परंपरा से जुड़े श्रोताओं के बीच पसंद किया जाता है। इस भजन में हिरणी अपने प्रिय के प्राणों की रक्षा के लिए भगवान हरि से प्रार्थना करती है।

इस पोस्ट में आपको Hirni Hari Su Araj Kare Lyrics हिंदी में पूरे रूप में पढ़ने को मिलेंगे। यह भजन संत कबीर से जुड़ा बताया जाता है और इसे राजस्थानी भजन शैली में प्रस्तुत किया गया है।

हिरणी हरी सू अरज करे (Hirni Hari Su Araj Kare Lyrics)

पिव बचाबा ने इक हिरणी,
हरी सू करे पुकार ।
बिन पिवजी के प्राण तजू,
सुण म्हारा किरतार ॥

ओ म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,
ओ म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।
म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।
ओ म्हारी समदर में डूबी जहाज,
हो...समदर में डूबी जहाज,
आ हिरणी हरी सू अरज करे ।

म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।

बावरिये ने बावर बांधी,
चौसठ बंध लगाय ।
हरी बावरिये ने बावर बांधी,
चौसठ बंध लगाय ।
हिरण्या कूद जंगल में नाखी,
हिरण्या कूद जंगल में नाखी,
मिरगा रो फँस गयो पाँव ।।
आ हिरणी हरी ने अरज करे ।
म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।

कहे मिरगलो सुण ये मिरगली,
तू गाफल मत होय ।
कहे मिरगलो सुण ये मिरगली,

तू धीरज मत खोय ।
तू तो कूद जंगल में रळ जा,
तू तो कूद जंगल में रळ जा,
हरी करे सो होय ।।
हिरणी हरी सूं अरज करे ।
म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।

तीन पाँव पर खड़ी मिरगली,
हरी सूं हेत लगाय ।
तीन पाँव पर खड़ी मिरगली,
हरी सूं हेत लगाय ।
हरी रो सिंहासन डोल्यो,
हरी रो सिंहासन डोल्यो,
बावरिया ने विष खाय ।।
आ हिरणी हरी ने अरज करे ।
म्हारे पियाजी रा प्राण बचाय,

हिरणी हरी ने अरज करे ।

टूटी डोर बंध हुआ ढीला,
मिरगा रो खुल गयो पाँव ।
अरी टूटी डोर बंध हुआ ढीला,
मिरगा रो खुल गयो पाँव ।
कहे कबीर सुनो भाई साधू,
कहे कबीर सुनो भाई साधू,
जोड़ी मिलाई भगवान ।
आ हिरणी हरी सूं अरज करे ।
म्हारा पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।
म्हारा पियाजी रा प्राण बचाय,
हिरणी हरी ने अरज करे ।
आ हिरणी हरी ने अरज करे ।
आ हिरणी हरी ने अरज करे ।

हिरणी हरी सू अरज करे भजन का भाव

इस भजन में एक हिरणी अपने प्रिय के संकट में पड़ने पर भगवान हरि से प्रार्थना करती है। भजन की कथा के माध्यम से भक्ति, विश्वास और भगवान की कृपा पर भरोसे का भाव व्यक्त किया गया है।

भजन की पंक्तियों में यह भावना दिखाई देती है कि कठिन परिस्थिति में भी भक्त को धैर्य बनाए रखते हुए भगवान पर विश्वास रखना चाहिए। इसी कारण यह भजन केवल लोकगीत के रूप में नहीं, बल्कि भक्ति और समर्पण की भावना से भी जुड़ा हुआ है।

Video: हिरणी हरी सू अरज करे | Chotu Singh Rawna | Hirni Hari Su Araj Kare | Rajasthani Bhajan

Singer : Chotu Singh Rawna 
Lyrics: Sant kabir das ji maharj

हिरणी हरी सू अरज करे से जुड़े प्रश्न

हिरणी हरी सू अरज करे भजन किस बारे में है?

यह भजन एक हिरणी द्वारा भगवान हरि से अपने प्रिय के प्राणों की रक्षा के लिए की गई प्रार्थना की भावनात्मक कथा प्रस्तुत करता है।

हिरणी हरी सू अरज करे के लिरिक्स कहाँ पढ़ें?

इस पोस्ट में Hirni Hari Su Araj Kare Lyrics हिंदी में दिए गए हैं। आप यहां भजन के पूरे लिरिक्स पढ़ सकते हैं।

हिरणी हरी सू अरज करे किस प्रकार का भजन है?

यह राजस्थानी भजन है, जिसे मारवाड़ी और लोक-भक्ति परंपरा से भी जोड़ा जाता है।

हिरणी हरी सू अरज करे भजन किसने गाया है?

इस भजन की एक लोकप्रिय प्रस्तुति Chotu Singh Rawna द्वारा की गई है। आपके page पर भी Singer के रूप में Chotu Singh Rawna का नाम दिया गया है।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!