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| लोहड़ी त्योहार Image by Tanuj Handa |
लोहड़ी त्योहार - भारत में पंजाब और हरियाणा लोहड़ी मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह त्यौहार पंजाब में पंजाबियों के द्वारा मनाया जाता है। अगर आप इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं कि लोहड़ी कब मनाया जाता है? तो आपको बता दें कि इस त्यौहार को हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। मकर संक्रांति से एक दिन पहले पंजाब में रहने वाले पंजाबी इसको सेलिब्रेट करते हैं।
इस दिन में मुख्य रूप से पंजाबियों के द्वारा आग की लड़कियों का एक घेरा बनाया जाता है और उसे घेरे में आग जलाने के पश्चात सभी लोग उसके चारों ओर खड़े हो जाते हैं। और फिर पारंपरिक रीति रिवाज के हिसाब से इस त्यौहार को सेलिब्रेट किया जाता है।
लोहड़ी कब है? 2026
मकर संक्रांति एक दिन पहले ही 13 जनवरी को लोहड़ी का उत्सव मनाया जाएगा, जो की मकर संक्रांति के एक दिन पहले है। इसके अलावा लोहड़ी संक्रांति का समय अगले दिन 14 जनवरी को सुबह 3:13 तक रहने वाला है। इस के महत्व की बात करें तो यह साल की शुरुआत और मध्य शीतकालीन में मुख्यतः मनाया जाता है इसके अलावा फसलों की कटाई भी इस त्यौहार को मनाने का एक महत्वपूर्ण कारण है।
लोहड़ी किन-किन राज्यों में मनाया जाता है?
आपको बता दें कि यह तो हर मुख्य रूप से पंजाब में मनाया जाता है लेकिन पंजाब के अलावा भी इसे हरियाणा राजस्थान और जम्मू कश्मीर में भी धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है।
और देश भर में जहां पर भी पंजाबी (सिख) रहते हैं, पिंड बनाकर अपने इस त्यौहार को सेलिब्रेट भी करते हैं। इस दौरान अपनी नई फसल को कटाई के बाद आग में अर्पित की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह त्योहार कैसे मनाया जाता है?
लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?
इस त्यौहार को लाल लोई के नाम सिटी जाना जाता है। इस दिन 13 जनवरी को अपने पिंड के एक स्थान पर इकट्ठे होकर लोहड़ी को मानते हैं, और लंबी लंबी लड़कियों का एक घेरा बनाकर उसमें अलाव लगाते हैं। इसके बाद फॉरेन पार्क रीति रिवाज के हिसाब से पूजा भी करते हैं और इस पूजा के दौरान गेहूं और जौ की बालियां अलाव में अर्पित की जाती है।
साथ में पारंपरिक नृत्य और गीत भी गए जाते हैं। इसके साथ ही सभी सिख भाई बहन अपने दोस्त और रिश्तेदारों और पिंड के लोगों को त्यौहार की बधाइयां देते हैं। इस तरह लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है। अगर आपको कभी इस त्यौहार को मनाने का मौका मिले, तो यह अवसर आप अपने हाथ से बिल्कुल भी नहीं जाने देना।
लोहड़ी का इतिहास
लोहड़ी पंजाबी (सिख) लोगों का एक मुख्य त्योहार है, जो की काफी पौराणिक समय से मनाया जा रहा है। लोहड़ी त्योहार का इतिहास कई कहानियों से जोड़ा जा सकता है जिसमें से एक कहानी दुल्ला भट्टी से संबंधित है। आपको बताते की दुल्ला भट्टी नाम का व्यक्ति हुआ करता था जो कि पंजाब की गौरवशाली इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
दुल्ला भट्टी एक न्यायप्रिय योद्धा और बहादुर व्यक्ति था, जो अक्सर गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करता था। पहले के समय में पंजाब में गरीब किसानों की लड़कियों को जमींदारों और अमीरों के द्वारा प्रताड़ित किया जाता था। और ऐसा भी लड़कियों की मदद दुल्ला भट्टी करता था। वह अमीरों से धन लूट कर गरीबों की मदद किया करता था।
इसके अलावा उन्होंने कई गरीब कन्याओं को गोद लेकर उनका ख्याल पिता की तरह रखा है, और कई कन्या की शादी भी बड़ी धूमधाम से कराई है। आज के समय बच्चे दुल्ला भट्टी की कथाएं लोकगीतों में गाई जाती है, क्योंकि इसने समाज के लिए अच्छे काम किए है।
लोहड़ी का त्यौहार मनाने की विधि -
1. सबसे पहले तो जल्दी उठकर स्नान किया जाता है। उसके बाद के घर की सफाई करें।
2. अलाव जलाने के लिए खुली जगह में लकड़ी इकट्ठी करें और रंगोली बनाकर गोबर के कंडे इकट्ठे करें।
3. शाम के समय शुभ मुहूर्त में पूरे विधि विधान के साथ अलाव जलाना शुरू करें।
4. इसी के साथ अपने परिवार वालों और दोस्तों रिश्तेदारों को भी एकत्रित करें।
5. विधि विधान के साथ पूजा करें. इसके लिए तिल, मूंगफली, रेवड़ी, मक्का, लड्डू मिष्ठान अग्नि में अर्पित करें।
6. अग्नि देव और सूर्य देव की परिक्रमा करें, इसी के साथ ही प्रार्थना करें।
7. परिक्रमा खत्म होने के बाद जिस स्थान पर आप खड़े हो, वहीं पर खड़े रहकर लोटे से थोड़ा सा पानी लेकर धरती पर गिराकर हाथ जोड़े।
8. इसके बाद संगीत और नृत्य, भोजन मिष्ठान, लोकगीत गायन किया जा सकता है।
- लेखक:- विशाल ओझा जी
अन्य लिंक -
Wikipedia - लोहड़ी
Utsav - लोहड़ी
