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| Basant Panchmi Shubh Muhurt 2026 |
Basant Panchmi Shubh Muhurt 2026 - भारत में साल में कई सारे त्यौहार मनाते जाते हैं, जिसमें से एक बसंत पंचमी है। प्रत्येक वर्ष यह माघ महीने में मनाया जाता है। इस साल बसंत पंचमी का त्यौहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। आपको बता दें कि हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का त्योहार ना केवल धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इस्तेमाल को काफी महत्वत्ता हमारे हिंदू पुराणों में दी गई है।
इतना ही नहीं बसंत पंचमी का त्यौहार ऋतु परिवर्तन के लिए मनाया जाता है। इस त्यौहार के बाद से ही सर्दियों का सीजन धीरे-धीरे कम होने लगता है और बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है इसलिए प्रत्येक वर्ष इस त्यौहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। अगर इसको मनाने की बात करें तो इस दिन सरस्वती माता की विशेष रूप से पूजा की जाती है और स्कूलों में की सरस्वती माता की पूजा वंदना की जाती है।
Basant Panchmi Shubh Muhurt 2026
अगर बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस साल 2026 में बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त माना जा रहा है। पंडित जी के अनुसार इस अवसर पर किसी भी नए कार्य की शुरुआत बिना किसी मुहूर्त के की जा सकती है। इसकी शुरुआत 23 जनवरी को सुबह 2:29 पर होने जा रही है जो की अगले दिन 24 जनवरी को सुबह 1:45 पर समापन होने वाला है, और मां सरस्वती की पूजा वंदना के लिए शुभ मुहूर्त की बात करें तो यह 23 जनवरी को सुबह 7:13 से लेकर दोपहर 12:34 तक रहने वाला है।
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बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत पंचमी की बनाने की कारण की बात करें तो भारत में इस त्यौहार को मनाने के पीछे का कारण ऋतु परिवर्तन है। यह एक धार्मिक कारण और आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। बसंत पंचमी के अवसर पर अधिकतर स्कूलों में और घरों में सरस्वती माता जी की पूजा वंदना की जाती है कि और उनसे आशीर्वाद के रूप में सद्बुद्धि मांगी जाती है।
हिंदू ग्रंथो के अनुसार देखा जाए तो यह दिन जीवन में ज्ञान कला और संगीत के प्रतीक के रूप में भी माना जाता है। चूंकि इस दिन माता सरस्वती की पूजा का अत्यधिक महत्व इसलिए इसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जानते हैं। आमतौर पर बसंत पंचमी का त्योहार प्रत्येक वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है जो कि इस बार जनवरी महीने में 23 तारीख को है, और सरस्वती पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में भी हमने आपको पहले ही बता दिया है।
सरस्वती माता की पूजा विधि
ऋतु परिवर्तन के अवसर पर बनाए जाने वाली बसंत पंचमी का त्योहार माता सरस्वती को समर्पित है। इस दिन माता सरस्वती की पूजा करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से किसी भी छात्र के जीवन में सुख समृद्धि आती है और उसे ज्ञान की प्राप्ति और बुद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सभी छात्र-छात्राओं को माता सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती की पूजा षोडशोपचार विधि से करने पर अच्छा फल मिल सकता है। स्टार्ट करने के बाद सुबह पीले रंग या सफेद रंग के वस्त्र पहनकर माता सरस्वती के मित्रों का जाप कर सकते हैं। इसके लिए माता सरस्वती की एक तस्वीर को अपने घर की पूजा स्थान पर विराजमान कर सकते हैं और उसके बाद उनको पीले रंग के या सफेद कलर के वस्त्र पुष्प अर्पण करिए।
पूजा स्थल पर भगवान गणेश की मूर्ति दी रख सकते हैं इसके अलावा अगर आप एक छात्र हैं तो अपनी किताबें पर और अन्य वस्तुएं पूजा स्थल पर रख सकते हैं। इसके अलावा विधि विधान के माता सरस्वती की पूजा करने के बाद या पूजा करने के दौरान माता सरस्वती जी का मंत्र 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' या फिर 'सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि' का 108 बार जब करने से भी लाभ प्राप्त होता है। माता सरस्वती के इन मंत्रों को बीज मंत्र कहा जाता है। ऐसा करने से सभी छात्रों को पढ़ाई में एकाग्रता प्राप्त होती है। चांद पर माता सरस्वती की आरती करने के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
क्यों है सरस्वती पूजा की मान्यता ?
जैसा कि आपको पता है कि बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है। लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है तो हम आपको बता देना चाहते हैं की पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी के मुख से बसंत पंचमी के दिन ही माता सरस्वती प्रकट हुई थी जिसके पास से ही पूरे संसार में अज्ञानता का विनाश हो गया था और इसके बाद से ही माता सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है।
इस दिन अबूझ मुहूर्त यानी की बिना किसी मुहूर्त के कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा आप विभिन्न प्रकार के शुभ कार्य जैसे की विवाह मुंडन गृह प्रवेश पंचांग बिना किसी मुहूर्त देख भी इस दिन कर सकते हैं। सरस्वती माता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत सुबह 7:13 होने वाली है और यह है दोपहर के 12:33 तक रहने वाली है।
