शिव भजन-सवैया-काल के भय से नंदी ने की (Shiv Bhajan - Savaiya Kal Ke Bhaya Se Nanadi Ne Ki)

M Prajapat
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शिव भजन-सवैया-काल के भय से नंदी ने की (Shiv Bhajan - Savaiya Kal Ke Bhaya Se Nanadi Ne Ki)
शिव भजन-सवैया-काल के भय से नंदी ने की

शिव भजन-सवैया-काल के भय से नंदी ने की (Shiv Bhajan - Savaiya Kal Ke Bhaya Se Nanadi Ne Ki)

शिव भजन-सवैया-काल के भय से नंदी ने की

काल के भय से नंदी ने की, घोर तपस्या एकांत में जाकर।
होके प्रसन्न हुए शिव सम्मुख, बोले कि मांगो जो इच्छा हो वो वर।।
अश्रु बहाके कहा तब नंदी ने, सेवा में स्वामी लगालो कृपाकर।
वाहन मुख्य बनाया प्रभू जी ने, नंदी को काल के जाल से लाकर।।

ब्रह्माजी बोले मां गौरा से एक दिन, बावरो रावरो नाथ भवानी।
जाके लिखी सुखभाल नहीं, उनको भी हैं देते ये औढरदानी।।
भार ये सृष्टि का सौंपिये और को, मेरे नहीं बस की ये कहानी।
सुनके विधाता की वाणी हंसे शिव, शंभुप्रिया मन में मुस्कानी।।

मांगिए शंभु सदाशिव से, जग में हैं बने जो कि काशी के वासी।
आठहुं सिद्धि नवों निधियां, जाके सेवा को नित्य रहें अभिलाषी।।
थोड़े किये से ही होते बड़े खुश, देते हैं वांछित फल अविनाशी।
शिव शिव शिव शिव कहकर तू, बनजा शिव का न रहेगी उदासी।।

आनंद छाए चतुर्दिश में, शिव का डमरू जब डिम-डिम बाजे।
तांडव नृत्य करें नटराज तो, कोटि रती पति देखिके लाजे।।
फीके लगें शशि सूर्य का तेज, सुहावन रूप कपूर सा साजे।
सांप का बिच्छू का है भले भूषण, शांति सदा शिव संग विराजे।।

शेष सुरेश करें जय जयकार जय, शंभु सदा सुखराशी की जै जै।
हैं सबको महलों में बसाते जो, ऐसे मसान निवासी की जै जै।।
काशी के वासी की नाथ कैलाशी की, विषधर विश्वविकासी की जै जै।
भाव से गाओ जी कहते ये जाओ जी, शिव शुभ पूरणमासी की जै जै।।

कोटि प्रपंच किया रति काम ने, किंतु नहीं शिव का मन डोला।
अंत में बाण चलाया अचूक, क्या होगा प्रभाव जरा भी न तोला।।
शिव के हृदय में लगा वह जैसे ही, क्रोध में शिव ने त्रिनेत्र को खोला।
भस्म हुआ क्षण मात्र में काम, हैं ये प्रलयंक कहाते जो भोला।।

ज्यादा नहीं कुछ चाह इन्हें बस, भांग-धतूर पे कोष लुटाते।
बेल के सुंदर पत्र पे ही, खुश होके हैं भक्तों के दोष मिटाते।।
शांत स्वभाव है निर्मल भाव, ये दुष्टों पे ही तो हैं रोष दिखाते।
जल इक लोटा इन्हें जो चढ़ाता है, उसकी ये संपति ठोस बनाते।।

नेत्र खुले जब ब्रह्म मुहूर्त में, मंत्र जपो ओम् नमः शिवाय।
नमः शिवाय में है सुख शाश्वत, वेद वेदांत रहे ये बताये।।
लोक बने परलोक बने सब शोक मिटे शिव का गुण गाये।
शिव के सिवा तो है शून्य चराचर, शिव से रहो नित लगन लगाये।।

Shiv Bhajan-Savaiya-Kal Ke Bhaya Se Nanadi Ne Ki | शिव भजन-सवैया-काल के भय से नंदी ने की

Singer: Amrita Chaturvedi Upadhyay
Lyrics: Sanand Sargam
Music: Rohit Kumar (Bobby)

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