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| Samudravasane Devi Lyrics |
Samudravasane Devi Lyrics: सुबह धरती वंदना का मंत्र और अर्थ
बिस्तर से उठकर जमीन पर पैर रखने से पहले हिन्दू धर्म में धरती माता को प्रणाम करने का विधान है। चूंकि हम पूरे दिन धरती पर चलते हैं और इसके संसाधनों का उपयोग करते हैं, इसलिए सुबह सबसे पहले माता पृथ्वी से क्षमा मांगते हुए उनका आभार व्यक्त किया जाता है।
आइए Bhakti Lyrics.com पर पढ़ते हैं यह पावन धरती वंदना श्लोक।
धरती वंदना मंत्र (Samudravasane Devi Mantra)
समुद्रवसने देवी, पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
मंत्र का हिंदी अर्थ (Meaning):
- समुद्रवसने देवी: हे देवी! जिसके चारों ओर महासागर रूपी वस्त्र लिपटे हुए हैं।
- पर्वतस्तनमण्डले: जिसके वक्ष स्थल पर ऊंचे-ऊंचे पर्वत सुशोभित हैं।
- विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं: हे भगवान विष्णु की पत्नी (धरती माता), आपको मेरा बार-बार नमस्कार है।
- पादस्पर्शं क्षमस्व मे: हे माता! मैं अपने पैरों से आपका स्पर्श कर रहा हूँ, कृपया मेरे इस स्पर्श के अपराध को क्षमा करें।
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