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| तुलसी पूजा और तुलसी विवाह 2026 |
तुलसी पूजा और तुलसी विवाह 2026: जानिए तिथि, शुभ विधि और इस दिन गाए जाने वाले प्रसिद्ध पारंपरिक गीत
प्राचीन काल से ही तुलसी को सभी ने मां के रूप में महत्व दिया है, हर घर में तुलसी का पौधा आँगन में लगाने ओर इसकी पूजा पाठ करने की परम्परा चली आ रही है। हिंदू धर्म में मां तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि एक वरदान माना जाता है, व साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रियार्द्धा (विष्णु प्रिया) माना गया है। कार्तिक मास और देवउठनी एकादशी के अवसर पर घरों में तुलसी विवाह का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन माता तुलसी और शालिग्राम जी का विवाह करवाकर घरों में सुख-समृद्धि का आह्वान किया जाता है।
यदि आप वर्ष 2026 में तुलसी पूजा और तुलसी विवाह की पूरी तैयारी कर रहे हैं, तो यह विस्तृत ब्लॉग पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। इसमें पूजा विधि के साथ-साथ इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले लोकप्रिय पारंपरिक गीतों की सूची भी दी गई है।
1. तुलसी विवाह 2026 कब है? (Tulsi Vivah 2026 Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि (जिसे देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है) से लेकर द्वादशी तिथि के बीच तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है।
वर्ष 2026 में तुलसी विवाह 21 नवंबर 2026 (शनिवार) के दिन मनाया जाएगा।
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 21 नवंबर 2026 को सुबह 06:31 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त: 22 नवंबर 2026 को सुबह 04:56 बजे
इस दिन सुहागिन महिलाएं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर मंडप सजाते हैं और तुलसी का विवाह शालिग्राम जी से कराते हैं। और इस दिन से हिंदू धर्म में सभी मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।
2. घर पर तुलसी पूजा और विवाह की आसान विधि (Tulsi Puja & Vivah Vidhi)
मंडप सजाना: तुलसी के गमले के चारों ओर गन्ने का मंडप सजाएं और उस पर लाल चुनरी ओढ़ाएं।
स्नान और श्रृंगार: तुलसी जी को स्नान कराएं और इसके बाद उनका सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और लाल चुनरी) से श्रृंगार करें।
विवाह की रस्में: शालिग्राम जी को रखें और तुलसी जी के साथ उनकी परिक्रमा कराएं। भगवान को तिलक लगाएं और विधि-विधान से पूजा करें।
भोग और आरती: तुलसी और शालिग्राम जी को फल, मिष्ठान और पंचामृत का भोग लगाएं। अंत में कपूर या घी के दीपक से "जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता" की आरती गाएं।
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3. तुलसी विवाह पर गाए जाने वाले पारंपरिक और लोकप्रिय गीतों की सूची (Tulsi Vivah Geet List)
तुलसी विवाह का उत्सव महिलाओं के लोकगीतों और भजनों के बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन मंडप के नीचे और पूजा के समय निम्नलिखित प्रसिद्ध गीत और भजन बहुत चाव से गाए जाते हैं:
यह तुलसी विवाह का सबसे लोकप्रिय बधाई गीत है, जिसमें तुलसी के सोलह श्रृंगार, बारात के आने और डोलियों का बहुत ही सुंदर वर्णन होता है।
इस पारंपरिक गीत में गणेश जी, भोले बाबा, लक्ष्मी-विष्णु और राम-सीता के तुलसी विवाह में शामिल होने का जिक्र किया जाता है।
यह तुलसी माता का बहुत प्रसिद्ध पौराणिक भजन है, जिसमें तुलसी की महिमा और कार्तिक मास की पूजा का वर्णन मिलता है। इसे तुलसी माता की आरती के रूप में गाया जाता हैं।
इस गीत में तुलसी के पौधे में सभी देवी-देवताओं और भगवान श्री कृष्ण के वास का भावपूर्ण वर्णन किया जाता है।*
यह एक बहुत ही प्यारा और मनमोहक सवाल-जवाब वाला भजन है जिसे महिलाएं विवाह के दौरान गाती हैं।
यह स्वागत गीत घर में तुलसी के आगमन और बरकत की कामना के लिए गाया जाता है।
4. तुलसी पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम
रविवार का वर्जित नियम: रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही इसके पत्ते तोड़ने चाहिए।
शाम के समय पत्ते न तोड़ें: सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को छूना या तोड़ना अशुभ माना जाता है।
शुचिता का ध्यान: तुलसी के पौधे को हमेशा स्नान करने और साफ वस्त्र पहनने के बाद ही स्पर्श करना चाहिए।
तुलसी का पौधा हमारे घर की आर्थिक संपन्नता और मानसिक शांति का प्रतीक है। तुलसी पूजा 2026 के इस पावन पर्व पर अपने घर में विधि-विधान से तुलसी विवाह संपन्न करें, मंगल गीत गाएं और भगवान विष्णु व माता तुलसी का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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