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| श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी चालीसा पाठ और दिव्य स्वरूप - Bhakti Lyrics |
सृष्टि की आद्यशक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की अधिष्ठात्री देवी माँ ललिताम्बा की कृपा प्राप्त करने के लिए श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी चालीसा का पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
सनातन परंपरा में माँ दुर्गा की शक्ति उपासना का महापर्व नवरात्रि अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। तांत्रिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दशमहाविद्याओं में सर्वोच्च स्थान पर विराजमान भगवती त्रिपुरा सुंदरी ही माँ ललिता का ही रूप हैं (ललिता और त्रिपुरा सुंदरी एक ही आदिशक्ति के स्वरूप हैं)।
यदि आप जीवन में सुख, शांति, ऐश्वर्य, भय से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति चाहते हैं, तो नित्य या विशेष रूप से नवरात्रि के पावन दिनों में माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें।
माँ त्रिपुरा सुंदरी चालीसा (Maa Tripura Sundari Chalisa)
॥ चौपाई ॥
जयति जयति जय ललिते माता, तव गुण महिमा है विख्याता॥
तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी, सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥
तू कल्याणी कष्ट निवारिणी, तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी॥
मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी, भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी॥
आदि शक्ति श्री विद्या रूपा, चक्र स्वामिनी देह अनूपा॥
ह्रदय निवासिनी-भक्त तारिणी, नाना कष्ट विपति दल हारिणी॥
दश विद्या है रुप तुम्हारा, श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा॥
धूमा, बगला, भैरवी, तारा, भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा॥
षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी, ललितेशक्ति तुम्हारी संगी॥
ललिते तुम हो ज्योतित भाला, भक्त जनों का काम संभाला॥
भारी संकट जब-जब आये, उनसे तुमने भक्त बचाए॥
जिसने कृपा तुम्हारी पायी, उसकी सब विधि से बन आयी॥
संकट दूर करो माँ भारी, भक्त जनों को आस तुम्हारी॥
त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी, जय जय जय शिव की महारानी॥
योग सिद्दि पावें सब योगी, भोगें भोग महा सुख भोगी॥
कृपा तुम्हारी पाके माता, जीवन सुखमय है बन जाता॥
दुखियों को तुमने अपनाया, महा मूढ़ जो शरण न आया॥
तुमने जिसकी ओर निहारा, मिली उसे सम्पत्ति, सुख सारा॥
आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी, महाशक्ति जय जय, भय हारी॥
कुल योगिनी, कुण्डलिनी रूपा, लीला ललिते करें अनूपा॥
महा-महेश्वरी, महा शक्ति दे, त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे॥
महा महा-नन्दे कल्याणी, मूकों को देती हो वाणी॥
इच्छा-ज्ञान-क्रिया का भागी, होता तब सेवा अनुरागी॥
जो ललिते तेरा गुण गावे, उसे न कोई कष्ट सतावे॥
सर्व मंगले ज्वाला-मालिनी, तुम हो सर्व शक्ति संचालिनी॥
आया माँ जो शरण तुम्हारी, विपदा हरी उसी की सारी॥
नामा कर्षिणी, चिन्ता कर्षिणी, सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी॥
महिमा तव सब जग विख्याता, तुम हो दयामयी जग माता॥
सब सौभाग्य दायिनी ललिता, तुम हो सुखदा करुणा कलिता॥
आनन्द, सुख, सम्पत्ति देती हो, कष्ट भयानक हर लेती हो॥
मन से जो जन तुमको ध्यावे, वह तुरन्त मन वांछित पावे॥
लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली, तुम्हीं शारदा चक्र-कपाली॥
मूलाधार, निवासिनी जय जय, सहस्रार गामिनी माँ जय जय॥
छ: चक्रों को भेदने वाली, करती हो सबकी रखवाली॥
योगी, भोगी, क्रोधी, कामी, सब हैं सेवक सब अनुगामी॥
सबको पार लगाती हो माँ, सब पर दया दिखाती हो माँ॥
हेमावती, उमा, ब्रह्माणी, भण्डासुर कि हृदय विदारिणी॥
सर्व विपति हर, सर्वाधारे, तुमने कुटिल कुपंथी तारे॥
चन्द्र- धारिणी, नैमिश्वासिनी, कृपा करो ललिते अधनाशिनी॥
भक्त जनों को दरस दिखाओ, संशय भय सब शीघ्र मिटाओ॥
जो कोई पढ़े ललिता चालीसा, होवे सुख आनन्द अधीसा॥
जिस पर कोई संकट आवे, पाठ करे संकट मिट जावे॥
ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बारा, पूर्ण मनोरथ होवे सारा॥
पुत्र-हीन संतति सुख पावे, निर्धन धनी बने गुण गावे॥
इस विधि पाठ करे जो कोई, दुःख बन्धन छूटे सुख होई॥
जितेन्द्र चन्द्र भारतीय बतावें, पढ़ें चालीसा तो सुख पावें॥
सबसे लघु उपाय यह जानो, सिद्ध होय मन में जो ठानो
ललिता करे हृदय में बासा, सिद्दि देत ललिता चालीसा॥
॥ दोहा ॥
ललिते माँ अब कृपा करो सिद्ध करो सब काम,
श्रद्धा से सिर नाय करे करते तुम्हें प्रणाम॥
माँ त्रिपुरसुंदरी चालीसा 🌺 धन, सौभाग्य और विजय देने वाली स्तुति | Lalita Tripura Sundari Chalisa
आदि शक्ति माँ त्रिपुरसुंदरी (ललिता देवी) का यह पावन स्वरूप साक्षात ब्रह्मांड की चेतना और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। इस वीडियो में प्रस्तुत है अत्यंत मनमोहक श्री त्रिपुरसुंदरी चालीसा, जिसके निरंतर और श्रद्धापूर्ण पाठ से जीवन में सुख-सौभाग्य, विजय और अपार सफलता की प्राप्ति होती है।
माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी समस्त श्रीविद्या की अधिष्ठात्री और करुणामयी देवी हैं। उनकी आराधना से साधक के सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के द्वार भी खुल जाते हैं।
इस दिव्य स्तुति को पूरे भक्तिभाव से सुनें और जगदम्बा माँ त्रिपुरसुंदरी की असीम अनुकंपा अपने जीवन में अनुभव करें।
📜 श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी चालीसा पाठ के नियम (Rules for Recitation)
माँ त्रिपुरा सुंदरी (ललिता देवी) की आराधना अत्यंत पवित्र और सात्विक मानी जाती है। चालीसा पाठ करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:
- शौच और पवित्रता: पाठ करने से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना माता की पूजा में शुभ माना जाता है।
- दिशा का ध्यान: पाठ करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
- दीपक और धूप: माता की प्रतिमा या श्रीचक्र / तस्वीर के सामने शुद्ध देशी घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
- आसन का प्रयोग: पूजा के दौरान हमेशा ऊन या कुशा के लाल रंग के आसान पर बैठकर ही पाठ करें।
- सात्विकता: पाठ के दिन सात्विक आहार लें और मन को शांत एवं भक्तिमय रखें।
- त्रिपुरा सुंदरी की आरती अनिवार्य: चालीसा का पाठ पूरा होने के बाद माँ त्रिपुरा सुंदरी की विधि-विधान से आरती अवश्य करनी चाहिए। आप यहाँ श्री त्रिपुरा सुंदरी (ललिता माता) की आरती पढ़ सकते हैं और अपनी पूजा को पूर्ण कर सकते हैं।
दुर्गा स्तुति - श्रीमहाभागवत महापुराण
🔢 ललिता त्रिपुरसुंदरी चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
- नित्य पूजा में: प्रतिदिन सुबह या शाम 1 बार या 3 बार पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।
- विशेष मनोकामना पूर्ति हेतु: किसी विशेष कार्य की सिद्धि या संकटों से मुक्ति के लिए रोजाना 7, 11 या 21 बार चालीसा का पाठ करना फलदायी होता है।
- नवरात्रि या गुप्त नवरात्रि में: नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन 11 बार पाठ करने से माँ त्रिपुरा सुंदरी की विशेष अनुकंपा और ऐश्वर्य प्राप्त होता है।
⚠️ पाठ करते समय क्या सावधानियां/ध्यान रखना चाहिए?
- स्पष्ट उच्चारण: चालीसा का पाठ करते समय शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। जल्दबाजी में गलत पाठ न करें।
- मन की एकाग्रता: पाठ करते समय इधर-उधर की बातें न सोचें, केवल माँ ललिता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें।
- श्रीचक्र या माता का ध्यान: पाठ शुरू करने से पहले माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी के स्वरूप या श्रीचक्र (Shri Yantra) का मानसिक ध्यान करें।
- आरती और क्षमा याचना: चालीसा पूर्ण होने के बाद माता की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी अनजाने भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
🌟 निष्कर्ष (Conclusion)
माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी करुणामयी और भक्तवत्सला हैं। जो भी साधक सच्चे हृदय से श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी चालीसा का नियमित पाठ करता है, माँ दुर्गा की कृपा से उसके जीवन के सभी कष्ट, रोग और दरिद्रता समाप्त हो जाती है तथा उसे भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
जय माँ ललिताम्बे! जय माँ त्रिपुरा सुंदरी!
